अपनी बुद्धि को परखने का तरीका है अपना आत्म विशवास देखना

१. जब हमारी उम्मीद छोटी हो तो तो इश्वर से कहना चाहिए की उसे बढ़ा दे | जब शांत हो तो जागृत करने को कहना चाहिए | जब उम्मीद ढूलमुल हो तो पक्का और कमजोर हो तो मजबूत करने को कहना चाहिए | और जब उम्मीद टूट गई हो तो इश्वर से कहे की उसे फिर से जोर दे |

२. प्राकृतिक की हर चीज अनोखी है, ताकतवर है| घास का एक कतरा पौधे का एक अंकुर या फिर दुनिया का कोई भी रंग ऐसा नहीं है जो हमें प्रसंता से नहीं भर सकता हो |

३. अपनी बुद्धि को परखना चाहते हो | समझना चाहते हो और जानना चाहते हो की यह कितनी गहरी और उपयोगी है तो सबसे अच्छा तरीका यह है की अपने मन मे झाककर देखे की आपक आत्मविशवास कितना दृढ है |

४. मन का संताप और पीरा किसी भी व्यक्ति के लिए नरक के सामान है |

५ . जब मालिक पर हमला होता है तो श्वान भी भौकता है | अगर मेरे मालिक मेरे इश्वर या मेरे भरोसे पर हमला हो जाता है और मै खामोश रह जाता हूँ तो मै डरपोक हु |

६. असली भरोसा कही नहीं होता | इसी का नतीजा है की हम सभी आंशिक रूप से नास्तिक होते है |

७. जब इश्वर को किसी राष्ट्र की परीक्षा लेनी होती है तो वह उसे दुष्ट और बुरा शासक देता है |

८. यह अहम् बात है की जैसे पेर को उसके फलो से पहचाना जाता है, वैसे ही बूढ़े आदमी को समाज मे प्रतिष्ठा से जाना जाता है |

९ सम्पूर्ण आनंद तक पहुचने के लिए सबसे बरी परेशानियो से गुजरना परता है|

१०. इन्सान सब समृद्ध हो जाता है तो गरीबी की तुलना से ज्यादा संकट मे होता है | जब सब कुछ आसानी से होता रहता है तब वह झूठी तारीफ और ग़लतफ़हमी मे पर जाता है | जबकि संघर्ष और संकट हमेसा सतर्क बनाये रखता है |

११ कोई इन्सान कैसा भी अच्छा या बुरा हमे उससे प्रेम करना चाहिए क्योकि हम इश्वर से प्रेम करते है और इंसान उसी की रचना है |

१२ सच्चे ज्ञान मे दो चीजे होती है इश्वर को  जानना और स्व्यंग  को जानना | ऐसा ज्ञान किसी काम का नहीं जो ईश्वर को , सत्य को न जनता हो या जानने मे मदद न करता हो |

 

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